चोटी की पकड़–58

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जमादार जटाशंकर ख़ज़ाने आए। वहाँ से मालखाने गए। रुस्तम की वर्दी पहनी। बाक़ी रहा थोड़ा समय पहरा देने लगे। पहरा बदला। दूसरे सिपाही आए। बात फैली कि रुस्तम जमादार हो गया। ...

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